आखिर कब चलेगा मिलावट खोरों पर योगी बाबा का हंटर?

मिलावट खोरों की चांदी

*कुंभकरणीय नींद में सोया प्रशासन **

हैदरगढ़ बाराबंकी। बाराबंकी स्वास्थ्य एवं खाद विभाग के उच्च अधिकारियों की मिली भगत के कारण होली के पर्व को ध्यान में रखते हुए दुकानदारों द्वारा भारी पैमाने पर मिलावट खोरी का धंधा फलता फूलता नजर आ रहा है। परंतु इस संबंध में खाद्य विभाग की ओर से कहीं पर भी आकस्मिक निरीक्षण नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण बेसन, रिफाइंड, तेल सरसों का तेल, दालो ,गरम मसाला,,खोवा, और मिठाइयों में भारी पैमाने पर मिलावट खोरी का कार्य निसंंकोच रूप से फल फूल रहा है। एवं खाद्य निरीक्षक हाथों पर हाथ धरे हुए बैठे हैं। जानकारी के अनुसार हैदरगढ़ का मुख्य कस्बा बाजार हो चाहे चौराहों की मशहूर दुकानें इसी क्रम में नरौली ,सुबेहा फतेहगंज सहित पोखरा, बड़वल, परीवा ,भिलवल, मंगलपुर चौराहा त्रिवेदीगंज चौराहा बारा एंव त्रिवेदीगंज चौराहा त्रिवेदीगंज मुख्य कस्बा बाजार में मिलावट खोरी का धंधा फल फूल रहा है यही नहीं इन मुख्य बाजारों के बड़े दुकानदारों के पास भारी पैमाने पर पान मसाले का स्टॉक मौजूद है परंतु माल कम होने का बहाना बना कर दुकानदार मझौले दुकानदारों को निर्धारित दर से ड़ेढ गुना दामों में बेंचकर मोटी रकम वसूलने का काम खुले आम कर रहे हैं। आपको अवगत करा दें कि मसाला गुटखा की अवैध बिक्री चरम पर देखी जा रही है जिसके कारण दो रुपए का पान मसाला छोटा ₹5 में ,और 5रू का बडा 8 रुपए में फुटकर आम ग्राहकों को मिल पा रहा है जबकि केंद्र सरकार के बजट के अनुसार बढ़ी हुई दरें एक अप्रैल से लागू होनी चाहिए । परंतु सूत्रों की माने तो इस मामले में स्थानीय प्रशासन से लेकर जिला प्रशासन के भी उच्च अधिकारी की सांठगांठ समझ में आ रही हैं यदि ऐसा कहना गलत है तो क्या उच्च अधिकारी गण यह बता सकते हैं की 1 अप्रैल से बढ़ी हुई दरों को जनवरी से ही क्यों लागू कर दिया गया है। जिन सामानों में बजट के अनुसार दरों कमी की गई है उन पर अभी छूट लागू नहीं है दुकानदार बताते हैं उपरोक्त सामान पर छूट 1 अप्रैल के बाद लागू होगी ऐसे में आम जनता अपने को टूटा और असहाय महसूस कर रही है ‌ और वर्तमान शासन एवं प्रशासन कोस रही है यदि समय रहते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं बाराबंकी जिले के जिला अधिकारी शशांक त्रिपाठी द्वारा इन मिलावट खोरो एंव निर्धारित दर से अधिक दामों पर बिक्री पर रोक ना लगाई गयी तो भविष्य में होने वाले 2027 की विधानसभा चुनाव पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। तब बाबा तुलसीदास की यही चौपाई चरितार्थ होगी कि, का वर्षा जब कृषि सुखाने।समय चुकि का पुनि पछिताने।‌

संपादक -रामकरन  सिंह की रिपोर्ट

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