- UAE ने पाकिस्तान को वर्षों से अरबों डॉलर की आर्थिक सहायता और कर्ज दिया है. साल 2023 में UAE ने 1 अरब डॉलर का नया कर्ज देने और 2 अरब डॉलर की जमा राशि बढ़ाने का वादा किया था. साथ ही 5 अरब डॉलर के ऑयल रिफाइनरी प्रोजेक्ट की भी योजना बनाई गई थी.
- 2024 में एडी पोर्ट्स ग्रुप ने कराची पोर्ट पर 25 साल के लिए संचालन का समझौता भी किया. हालांकि पाकिस्तान के कंगाल हालात देखते हुए यूएई ने रोलओवर से इनकार कर दिया है, जिसके बाद पाकिस्तान खिसिया गया है. यह रकम पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार का करीब 18% है, जो 27 मार्च तक 16.4 अरब डॉलर था और सिर्फ तीन महीने के आयात के लिए पर्याप्त है.

क्यों बढ़ा पाकिस्तान-यूएई का विवाद?
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान आर्थिक दबाव से जूझ रहा है और उसके खुद खाने के लाले पड़े हुए हैं. मूलभूत चीजें भी पाकिस्तान में ऊंचे दामों पर मिल रही हैं. इस बीच UAE ने 3 अरब डॉलर के कर्ज को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया, तो पाकिस्तान बौखला गया. ऐसा पिछले 7 साल में पहली बार हुआ है और पाकिस्तान इसे अपनी नाकामी मानने के बजाय भारत को बीच में घसीट रहा है.
कर्जा पाकिस्तान का, क्यों आया अखंड भारत का नाम?
मुशाहिद हुसैन अपने होश में बात नहीं कर रहे थे, तभी तो कर्जा चुकाने के उपाय ढूंढने के बजाय वो भारत और यूएई के रिश्तों में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे थे. उन्होंने कहा कि UAE को भारत से सावधान रहना चाहिए, क्योंकि वहां करीब 1 करोड़ की आबादी में से 43 लाख भारतीय हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि उन्हें सावधान रहना चाहिए कि कहीं UAE अखंड भारत एजेंड का हिस्सा न बन जाए. एक तरफ तो शहबाज शरीफ कहते हैं कि आईएमएफ से कर्जा लेने के लिए उन्हें सिर झुकाना पड़ता है और वहीं दूसरी ओर उनके पाकिस्तान के सांसद यूं बातें कर रहे हैं, मानों कहीं के तुर्रम खान हों.

